Motivation stories in hindi




एक बार की बात है पाउलो पिकासो न्यूयॉर्क में एक सड़क पर घूम रहे थे, एक महिला उनसे टकराई, महिला ने पहचान लिया - आप पाउलो पिकासो है मैंने आप को पहचान लिया वह भागी भागी गई और एक पेपर लेकर आई और पाउलो के हाथ में दिया ।
और कहा -: सर आप एक बहुत बड़े पेंटर हैं क्या आप मेरे लिए कुछ स्केच ड्रॉ कर सकते हो, उन्होंने पेपर लिया और पेन लिया स्केच ड्रॉ किया और उस महिला को दे दिया मात्र 30 सेकंड में स्केच बनाया ।
और कहा -: यह आपके लिए, यह पेंटिंग 50 लाख की है महिला को विश्वास नहीं हुआ कि यह कैसे संभव है कि 30 सेकंड में बनी पेंटिंग 50 लाख की है वह महिला गई। और तीन चार जगह पर उसका रेट पूछा । खरीददारो ने कहा-: यह पावलो पिकासो की पेंटिंग है मैम,
महिला ने कहा-: हाँ यह पावलो पिकासो की पेंटिंग है।
महिला ने कहा -: कितने मे खरीदोगे।
खरीददार ने कहा-: मैडम कम से कम 50लाख हम इसके दे सकते हैं,
महिला शॉक हो गई और उसने पता किया पावलो पिकासो कहा रहते हैं ढूंढते ढूंढते पावलो पिकासो के पास पहुंची।
और कहा-: सर आपने मुझे पहचाना मैं वही महिला हूं मैं आपको मिली थी और आपने मेरे लिए एक पेंटिंग ड्रॉ करी थी 30 सेकंड में 50 लाख रूपये की, सर ये वाकई मे 50 लाख कि है।
पाउलो ने कहा मैं जानता हूं मैंने बनाई है।
उसने कहा-: मैं सीखना चाहती हूं 30 सेकंड में 50 लाख की पेंटिंग बनाना।
तब पाउलो ने कहा-: देखो मित्र पेंटिंग 30 सेकंड में 50 लाख की बनी हुई देखी किन्तु उसको बनाने के लिए मुझे 30 साल लग गए ।

शिक्षा-: practise makes a man parfect .
मतलब आपको धैर्य के साथ निरंतर प्रैक्टिस करना होगा अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होना होगा और दृढ़ता रखनी होगी। यदि कोई आपको 1 दिन में एक लाख कमाता दिख रहा है तो उसका इतिहास जानिये कि उसके लिए उसने अपने जीवन के कितने ही साल उस काम को करने में समर्पित कर दिये आपको भी अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होना होगा। तभी आप मनचाहा लक्ष्य प्राप्त कर सकते है। 

 फिर मिलते है अगली ऐसी हि inspiration story के साथ।



संगीतकार जिमी का संघर्ष


singer
जब पैदा हुए थे तब उनके पिता सेना में सेवाएं दे रहे थे और स्थितियां कुछ इस प्रकार बनती चली गई कि जिमी के पिता उन्हें काफी समय बाद देख पाए एक मजेदार बात यह है कि जिमी के पापा खुद एक अच्छे जैज डांसर थे।
लेकिन उनका यह शौक प्रोफेशनल तौर पर कोई आकार नहीं ले पाया। आर्मी से वापस आने के बाद भी। उनका काफी समय एक अच्छा जॉब ढूंढने में चला गया।
और फिर जब जिमी नौ साल के थे, उनके माता-पिता अलग हो। गए। फिर पंद्रह साल की उम्र में ही जिमी ने अपनी मां को हमेशा के लिए खो दिया।
दुख उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गए थे। लेकिन एक चीज थी जिसने जिमी को हमेशा खूशी दी और वह था उनका गिटार। 15 साल की उम्र से ही जिमी ने गिटार से दोस्ती कर ली थी और इसके बाद गिटार हमेशा उनका सबसे अच्छा और सच्चा दोस्त बनकर रहा।
तब, जब वो आर्मी में कठिन डिसीप्लीन और अपने साथी ट्रेनीज की टांग खिंचाई का टारगेट थे और तब भी जब वो एक म्यूजिशियन बनने के लिए स्ट्रगल कर रहे थे, गिटार उन्हें हर समय सुकून देने का काम करता था आज दुनिया के महान इलेक्ट्रिक गिटारिस्टरस में जिमी की गिनती होती है।
उन्होंने अपने जमाने के कई मशहूर म्यूजिशियन्स के साथ भी काम किया लेकिन कोई भी लंबे समय तक उनको बांध कर नहीं रख पाया।
यह कहा जाता। है कि उन्होंने हाई रॉक, जैज और ब्लूज़ के साथ प्रयोग करके कुछ ऐसा अद्भुत संगीत बनाया था कि सुनने वाले मंत्रमुग्ध हो जाते थे। दुखद बात यह है कि यह अनोखा संगीतकार मात्र 28 साल की उम्र में ही दुनिया को अलविदा कह गया.. ।
और 8 साल की इस यात्रा में भी मरने के केवल 3-4 साल पहले से उन्हे पहचान मिलनी शुरू हुई थी। क्योंकि इसके पहले लोग उनके प्रयोगों को समझ ही नहीं पाए।
उनके दुनिया से जाने के बाद लोग यह जान पाए कि जिमी के वो प्रयोग जिन्हें बिना ध्यान से सुने नकार दिया गया, असल मे संगीत के क्षेत्र के मास्टर पीस हैं। आज दुनिया भर के संगीत विशेषज्ञ और जानकार जिमी की रचनाओं को बेजोड़ मानते हैं।

जिमी के जीवन मे कितनी मुश्किलें आई। उनकी छोटी उम्र में ही उनके माता-पिता अलग हो गए। थोड़े बड़े हुए उनकी माता गुजर गई, सोचे इतनी मुश्किलों और संघर्षों के बाद भी जिमी अपने लक्ष्य में अडिग रहा चाहे दुनिया ने उन्हें देर से पहचाना किंतु उन्होंने दुनिया से अपना लोहा मनवा कर रहे। आप भी जीवन में संघर्ष करिए और अपने लक्ष्य में अडिग रहिए देखना एक न एक दिन सफलता आपको जरूर प्राप्त होगी।



लाइनस टोरवाल्ड्स की जीवनी

linux

लाइनस बेनेडिक्ट टोरवाल्ड्स अमेरिकी सॉफ्टवेयर इंजीनियर है इन्हें ऐतिहासिक रूप से लिनक्स कर्नेल के प्रमुख डेवलपर के रूप में जाना जाता है।
इन्हीं के नाम पर ओपन सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम लिनक्स
को अपना नाम मिला था।
उन्होंने वितरित संस्करण नियंत्रण प्रणाली Git भी बनाया उन्हें कंप्यूटर के लिए बनाए गए ओपन सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम, सॉफ्टवेयर लिनक्स के लिए मिलेनियम टेक्नोलॉजी प्राइस से भी सम्मानित किया जा चुका है।

हेलसिंकी यूनिवर्सिटी से कि पढा़ई

1988 से 1996 के बीच लाइनस ने हेलसिंकी यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में स्नातक की डिग्री के साथ मास्टर डिग्री भी हासिल की 1989 मे उनकी पढ़ाई बाधित हुई क्योंकि फिनलैंड में अनिवार्य सैन्य सेवा को पूरा करने के लिए उन्हें 11 महीने का अधिकारी प्रशिक्षण कार्य कोर्स करना पड़ा था।
1990 में उन्होंने फिर से पढ़ाई शुरू की जहां उन्हें यूनिक्स के बारे में जानने को मिला।

11 साल की उम्र में शुरू की प्रोग्राम

कंप्यूटर के प्रति लाइनस का लगाओ 11 साल की उम्र में शुरू हो गया था जब उन्होंने कोमोडोर वीआईसी-20 कंप्यूटर पर प्रारंभिक रूप से बेसिक में प्रोग्रामिंग शुरू कर दी थी लेकिन बाद में उन्होंने सीधे मशीन कोड में 6502 सीपीयू पर काम शुरू कर दिया असेंबली लैंग्वेज का इस्तेमाल नहीं किया। वीआईसी-20 के बाद सिनक्लेयर क्यूएल खरीदा, जिसमें उन्होंने ऑपरेटिंग सिस्टम में बदलाव किए।

इनके नाम पर बना ऑपरेटिंग सिस्टम 

लिनक्स का पहला प्रोटोटाइप सार्वजनिक रूप से 1994 में जारी किया गया था प्रारंभ में लाइनस टोरवाल्ड्स अपने प्रोजेक्ट का नाम फ्रेक्स रखना चाहते थे लेकिन उनके दोस्त लैंड मार्क ने उन्हें उनके ही नाम पर लाइनस नाम रखने को कहा दुनिया भर के सभी सुपरकंप्यूटर इसी ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करते हैं यही नहीं आईटी सेक्टर के लिए भी लिनक्स एक आवश्यकता बन चुका है।



मेट-मुलनवेग ( वर्ल्ड प्रेस के सह संस्थापक)

wordpress


मेट मूलनवेग का जन्म 11 जनवरी 1984 को हॉस्टन टेक्सास अमेरिका में हुआ था। इन्होंने प्रसिद्ध ओपन सोर्स वेब सॉफ्टवेयर वर्ल्ड प्रेस कि स्थापना कि।
वर्ल्ड प्रेस एक ऐसा ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर है जिसके इस्तेमाल से आप वेबसाइट ब्लॉग और ऐप बना सकते हैं।

आपको जानकर हैरानी होगी कि इंटरनेट पर चलने वाली वेबसाइट में से करीब 30% वेबसाइट का संचालन वर्डप्रेस करता है, इस सॉफ्टवेयर की सफलता के पीछे मेट मूलरवेग की मेहनत और लगन है।इस क्षेत्र में उन्होंने काफी मेहनत की है तो बात कुछ ऐसी है कि, मूलन वेग को अपने यूनिवर्सिटी समय से ही ब्लॉगिंग की धुन सवार थी।

मूलन अपने मित्र माइक लिटल के साथ मिलकर वर्डप्रेस का सोर्स कोड बना रहे थे उन्होंने वर्ष 2003 के इस कोड को लॉन्च किया। इसके बाद कारणवश 1 साल के बाद ही वह संस्थान छोड़कर कैलिफोर्निया के सैन फ्रांसिस्को में एक इंटरनेट टेक्नोलॉजी सीएनईटी के साथ जुड़ गए इसके बाद वर्ष 2009 में उन्होंने ऑटोमेटिक नामक कंपनी की शुरुआत की एक सॉफ्टवेयर डेवलपर के साथ-साथ एक अच्छे फोटोग्राफर भी है।

उनका कहना है कि वह वर्डप्रेस यूजर का एक ऐसा ग्रुप बनाना चाहते हैं जो अगले 20 से 25 साल तक सभी को जोड़ सकें। वे दुनिया भर में होने वाले वर्डप्रेस में हिस्सा भी लेते हैं जो ब्लॉगर और डेवलपर्स को आकर्षित करने का माध्यम बनते जा रहे हैं।

उनका कहना है कि यूजर्स के प्रोत्साहन से ही आगे बढ़ने की गति मिलती है।वे यूजर्स के लिए इनोवेशन को महत्व देते हैं।


वसीम जाफर की सफलता


indiancricket

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ओपनर वसीम जाफर इंटरनेशनल लेवल पर तो लंबी पारी नहीं खेल पाए, लेकिन उन्होंने घरेलु किकेट में अलग मुकाम बनाया। खासकर रणजी ट्रॉफी में उनके नाम कई रेकॉर्ड हैं।

यहा तक पहुंचने में जाफर का संघर्ष कम नहीं रहा। मुम्बई मे जन्मे जाफर के पिता बस ड्राइवर थे। उनके पिता का सपना था कि उनके चार में से कम से कम एक बेटा देश के लिए, क्रिकेट खेले।

घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। उनकी माँ अचार बनाने सहित कई काम करती थी। जाफर भी अचार बनाने में मदद किया करते थे। जाफर स्कुल आने से पहले और बाद मे कई घंटे क्रिकेट खेलते थे। 18 वर्ष की उम्र में उन्हें मुंबई रणजी टीम मे शामिल किया गया।

उन्होंने दुसरे प्रथम श्रैणी मैच में 15 रन की पारी खेली यह पहला मौका था जब किसी बल्लेबाज ने मुंबई के लिए होमग्राउंड से बाहर तिहरा शतक लिगाया।

अच्छे प्रदर्शन के बूते पर जाफर को फरवरी 200 में मुबई में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट डेब्यू करने का मौका मिला।

उन्होंने आखिरी टेस्ट भी दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ही खेला। अपने कॅरियर के 31 टेस्ट में पांच शतक लगाए जिसमें दो दोहरे शतक थे।

भले ही अंतरराष्ट्रीय करियर ज्यादा लंबा नही चला, पर घरेलु क्रिकेट में उनके बल्ले से लगातार रन निकलते रहे।
जाफर के नाम रणजी ट्रॉफी में सबसे ज्यादा 156 मैच खेलने का रेकॉर्ड है। रणजी में सर्वाधिक 12,038 रन व सबसे अधिक 40 शतक और 200 कैच रेकॉर्ड भी उन्हीं के नाम है।

दलीप ट्रॉफी में सर्वाधिक 2545 व ईरानी ट्रॉफी 1294 रन का रेकॉर्ड भी उनके नाम है। वह 10 बार रणजीत जीतने वाली टीम के सदस्य रहे। हाल ही उत्तराखंड टीम के कोच नियुक्त किए गए हैं।

Moral-: यदि मन मे कुछ कर गुजरने कि लगन हो तो चाहे कितनी हि रूकावटे रोकने का प्रयास करे किन्तु इंसान अपना लक्ष्य प्राप्त कर हि लेता है।

वसीम जाफर के जीवन मे भी कई संघर्ष आये किन्तु उन्होने अपनी यात्रा जारी रखी। आर्थिक स्थिति अच्छी न होने पर भी उन्होने अचार बनाना फिर बेचना ओर भी कई काम करते थे। कुछ लोग बहाने बनाना कर बचने का प्रयास करते है किन्तु जिनके मन मे अपने लक्ष्य के प्रति सच्ची चाह होती है उन्हे राह मिल हि जाती है।


-आर्यन शर्मा

Comments

Popular posts from this blog

सर्व प्राणियों की पीड़ा का बोध -

a brain biggest than buffalo

Don't be too naive