आत्मबल का महत्त्व

 

 आत्मबल एक ऐसा गुण है, जो हमारे पुरुषार्थ को जाग्रत रखता
यह गुण कठिन क्षणों में ऊर्जा का स्रोत साबित होता है।
आत्मबल हमें हर बुराई और विघ्न-बाधाओं से बचाता है। कहते हैं कि
मरणासन्न शरीर में भी नवजीवन का संचार कर दे, ऐसी अमृत बूंद है
आत्मबल। सच तो यह है कि जहां कोई प्राणी हमारा सहायक नहीं होता,वहां हमारा आत्मबल हमें सहारा देता है। यह हमें न सिर्फ दृढसंकल्पीऔर साहसी बनाता है, बल्कि जीवन-संग्राम में जीतने की अदम्य इच्छाशक्ति भी प्रदान करता है। यह हमें न सिर्फ अच्छे कर्म करने
के लिए प्रेरित करता है, बल्कि हमें प्रतिकूल
परिस्थितियों से निकलने की हिम्मत भी देता
है। यह हमारा ऐसा बलवान साथी है, जो
जीवन के घनघोर अंधेरे से हमें बाहर
निकाल सकता है। आत्मबल संसार का
सबसे बड़ा बल है। यह बल मनुष्य के
सर्वांगीण विकासका कारण और समाज का
उत्थान करन वाला है। अतः मनुष्य को

सरलता से जीवन जीना चाहिए। धन, लोभ,
आकांक्षा, अहंकार और पद-प्रतिष्ठा के
चक्कर में हम अपना पूरा जीवन बिता देते
हैं। इसलिए समय की कीमत समझने वाले

इसे व्यर्थ नहीं करते, क्योंकि बीता समय वापस नहीं आने वाला है।
आत्मबल जिसका साथी है, वह कभी कमजोर नहीं पड़ता। निराशा
उसके हृदय को छू भी नहीं पाती। ऐसे लोग अपने आत्मबल की वजह
से देश और दुनिया पर राज करते हैं। इसके विपरीत आत्मबलहीनता बहुत ही खतरनाक रोग है, जो हमें कमजोर ही नहीं करता, बल्कि दूसरों के समक्ष दब्बू भी बना देता है। इसलिए हमें इससे बचना चाहिए और अपने आत्मबल को बनाए रखना चाहिए। प्रकृति एक पाठशाला है और इसके सान्निध्य में हमेशा जीवन निखरता है। ओस की एक बूंद भी जीवन दर्शन सिखाने के लिए पर्याप्त है। जिंदगी में परस्पर सामंजस्य बिठाना बहुत जरूरी है। जिस व्यक्ति ने ऐसा करना सीख लिया, फिर उस पर नकारात्मक बातों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

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