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Showing posts from December, 2020

आत्मबल का महत्त्व

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   आत्मबल एक ऐसा गुण है, जो हमारे पुरुषार्थ को जाग्रत रखता यह गुण कठिन क्षणों में ऊर्जा का स्रोत साबित होता है। आत्मबल हमें हर बुराई और विघ्न-बाधाओं से बचाता है। कहते हैं कि मरणासन्न शरीर में भी नवजीवन का संचार कर दे, ऐसी अमृत बूंद है आत्मबल। सच तो यह है कि जहां कोई प्राणी हमारा सहायक नहीं होता,वहां हमारा आत्मबल हमें सहारा देता है। यह हमें न सिर्फ दृढसंकल्पीऔर साहसी बनाता है, बल्कि जीवन-संग्राम में जीतने की अदम्य इच्छाशक्ति भी प्रदान करता है। यह हमें न सिर्फ अच्छे कर्म करने के लिए प्रेरित करता है, बल्कि हमें प्रतिकूल परिस्थितियों से निकलने की हिम्मत भी देता है। यह हमारा ऐसा बलवान साथी है, जो जीवन के घनघोर अंधेरे से हमें बाहर निकाल सकता है। आत्मबल संसार का सबसे बड़ा बल है। यह बल मनुष्य के सर्वांगीण विकासका कारण और समाज का उत्थान करन वाला है। अतः मनुष्य को सरलता से जीवन जीना चाहिए। धन, लोभ, आकांक्षा, अहंकार और पद-प्रतिष्ठा के चक्कर में हम अपना पूरा जीवन बिता देते हैं। इसलिए समय की कीमत समझने वाले इसे व्यर्थ नहीं करते, क्योंकि बीता समय वापस नहीं आने वाला है। आत्मबल जिसका साथी है, वह

आप जानते हैं? DO YOU KNOW लॉनमोवर पर लंबी दूरी

लानमोवर पर सबसे लंबी दूरी तय करने का खिताब ब्रिटेन के एंडी मैक्सफील्ड को मिला है। उन्होंने 1407 किलोमीटर की दूरी 5 दिन, 8 घंटे और 36 मिनट में तय की। दरअसल वे अल्झाइमर्स सोसाइटी की मदद करना चाहते थे। और इसी के लिए चेरिटी एकत्र करने के उद्देश्य से उन्होंने यह यात्रा की।

मेहनत का फल

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बहुत पहले की बात है, एक गांव में भोला नाम का एक गरीब आदमी रहता था। उसके पास थोड़ी बहुत जमीन थी पर वह खेती व अन्य काम-धंधा कुछ भी नहीं करता था। उसने एक भैंस पाल रखी थी। उसी को चराता और सुबह-शाम उसका दूध निकाल कर बेच देता था। इस तरह से अपनी जीवन यापन करता था। एक बार वह कहीं जा रहा था। भोला ने उनके चरण स्पर्श किये और उनसे पूछा- गुरुजी आप कहाँ से पधार रहे हैं? गुरुजी ने कहा कि वत्स हम बहुत दूर से आ रहे हैं। हमें बहुत भूख लग रही है, और हम भोजन की तलाश में है। भोला ने कहा कि गुरुजी दिन तो अस्त हो ही गया, रात होने वाली है इसलिए आप दोनों रात्रि विश्राम मेरे यहाँ करें। यह सुनकर गुरू-शिष्य दोनों प्रसन्न होकर उसके साथ घर चल दिए। घर जाकर भोला ने भैंस का दूध निकाला और दोनों अतिथियों को गरम-गरम दूध पिलाया, उन्हें भोजन करा कर सोने के लिए बिस्तर लगा दिए। गुरुजी ने रात में भोला से पूछा- "भोला तुमने केवल एक भैंस ही पाल रखी है। तुम्हारे पास तो जमीन है, खेती भी है। तुम खेती क्यों नही करते?" भोला ने कहा- "गुरुजी खेती में धूप बहुत लगती है, भयंकर ठण्ड में खेत पर जाना पड़ता है। बरसात में पानी ब

फ़िज में रखे अंडे की पोषकता इसलिए कम हो जाती है

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कई रिसर्च में पाया गया है कि अंडों को लंबे समय तक कम तापमान पर रखने से उनका पोषण कम हो जाता है। कमरे के तापमान पर रखे अंडे, फ्रिज में रखे अंडों की तुलना में अधिक सेहतमंद होते हैं। फ्रिज में रखने से इसमें पाए जाने वाले प्रोटीन, कैल्शियम और ओमेगा 3 फैटी एसिड आदि नष्ट हो जाते हैं। यूरोपीय अंडा विपणन नियमों के अनुसार, अंडों को फ्रिज में रखने के बाद उन्हें रूम टेंपरेचर पर रखने की प्रक्रिया कंडेनसेशन का कारण बन सकती है। कंडेनसेशन अंडे के छिलके पर मौजूद बैक्टीरिया की गति को बढा सकता है। इससे बैक्टीरिया अंडे के भीतर पहुंच सकते है। ऐसे अंडे खाना सेहत के लिए ठीक नही होते।
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आप जानते हैं? DO YOU KNOW लॉनमोवर पर लंबी दूरी लानमोवर पर सबसे लंबी दूरी तय करने का खिताब ब्रिटेन के एंडी मैक्सफील्ड को मिला है। उन्होंने 1407 किलोमीटर की दूरी 5 दिन, 8 घंटे और 36 मिनट में तय की। दरअसल वे अल्झाइमर्स सोसाइटी की मदद करना चाहते थे। और इसी के लिए चेरिटी एकत्र करने के उद्देश्य से उन्होंने यह यात्रा की।

वैज्ञानिकों ने खोजा बुढ़ापा लाने वाला जीन और इसे रोकने की प्रक्रिया अब नहीं फटकेगा बुढ़ापा, खुलकर बोलें-अभी तो मैं जवान हूं

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जवानी नींद भर सोया और बुढ़ापा देख कर रोया। लेकिन अब बुढ़ापा आपको छू भी नहीं पाए और आप खुलकर बोल सकेंगे कि अभी तो मैं जवान हूं। जी हां, वैज्ञानिकों ने उस जीन की खोज कर ली है तो कि शरीर में बढ़ापा लाता है। साथ ही वैज्ञानिकों ने उस प्रक्रिया का भी सफलतापूर्वक परीक्षण कर लिया है जिसके द्वारा शरीर में बुढ़ापे को धीमा कर दिया जाएगा। स्टेम सेल मैग्जीन में प्रकाशित वैज्ञानिकों की इस नवीन खोज से जल्द ही बड़े बदलाव आने की उम्मीद है। सेल्युलर रीप्रोग्रामिंग से होगा कायाकल्पः यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन के डॉ. वॉन ज ली के अनुसार बुढ़ापा दरअसल मैनसेक्यमाल स्टेम सेल (एमएससी) की गतिविधियों और कार्यप्रणाली में आने वाली कमी होती है। अब नए शोध से एमएससी के दवाओं और अन्य उपचार के माध्यम से बुढ़ापे को किया जा सकेगा। इसके लिए सेल्युलर (कोशिका) रीप्रोग्रामिंग की जाएगी। मैनसेक्यमाल स्टेम सेल का दवाओं और उपचार से सेल्युलर रीप्रोग्रामिंग की जाएगी। शरीर के जोड़ों में छिपा है राज: घुटनों व कोहनी के सनोविअल फ्लूड से एमएससी को रीप्रोग्राम कर प्लूरीपोटेंट स्टेम सेल (पीएसएस) में डाल देते हैं। फिर पीएसएस में युवा हु

गर्भ संस्कार की आवधारणा

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काशी हिंदू विवि के आयुर्वेद विज्ञान विभाग ने गर्भ संस्कार शिक्षा देने की शुरूआत की है। कैम्ब्रिज विवि भी गर्भ संस्कार की आवधारणा को मान चुका है। भारत में ये प्रयोग जमशेदपुर के 'फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गाइनेकोलॉजिकल सोसाइटी', इंदौर में अभिभावक प्रशिक्षण संस्थान और हिंदी विवि भोपाल में शुरू हो चुके हैं। इन संस्थानों में गर्भस्थ शिशु को तकनीक के जरिए गणित और विज्ञान जैसे जटिल विषयों में दक्ष करने के उद्देश्य से यह शिक्षा दी जा रही है। इसे 'अद्भुत मातृत्व' की संज्ञा दी गई है। अर्जुन पुत्र अभिमन्यु का गर्भ में रहते चक्रव्यूह भेदने की शिक्षा लेने, लेकिन बाहर निकलने की विधि सुनने के समय मां का सो जाने से तात्पर्य है कि मां की कोख से कोई संपूर्ण ज्ञान प्राप्त करके नहीं आता। सारा ज्ञान जीवन की जटिलताओं से जूझते हुए ही सीखा जा सकता है। उपनिषदों में एक अन्य कथा भी गर्भ शिक्षा से जुड़ी है। ऋषि उद्दालक की पुत्री सुजाता का विवाह शिष्य कहोड़ से हुआ था। सुजाता के गर्भवती होने के बाद कहोड़ श्लोकों का गलत पाठ करते तो शिशु टोकता, 'पिताजी आप गलत वेद पाठ कर रहे हैं।' पिता क्रोधि
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तेज ध्वनि से ब्लड़ प्रेशर बढ़ने के साथ कैंसर का खतरा यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर ऑफ मेंज, जर्मनी में शोर (तेज आवाज) पर हुए एक शोध में कहा गया है कि तेज ध्वनि सुनने से न केवल हाई ब्लड प्रेशर बढ़ता बल्कि डीएनए को नुकसान होता है। इससे कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा रहता है। अध्ययन चूहों पर किया गया है। वैज्ञानिकों ने चार दिन तक चूहों को तेज ध्वनि सुनाने के बाद पाया कि उनका बीपी बढ़ गया था।   इन लोगों को अधिक खतरा   उन्हें ज्यादा खतरा रहता है जो कल-कारखानों, हवाईअड्डे, रेलवे स्टेशन्स पर काम करते या फिर तेज म्यूजिक सुनते हैं। उन्हें बीच - बीच में अपने कानों को आराम देना चाहिए। तेज शोर से कान को भी नुकसान हो सकता है। मानसिक परेशानी जैसे चिड़चिड़ापन आदि की समस्या हो सकती है। याद्दाश्त संबंधी परेशानी भी देखने को मिल सकती है।

खाने से एक घंटे पहले या बाद में ही पीनी चाहिए चाय-कॉफी

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  डॉक्टरों की मानें तो खाने से एक घंटा पहले और एक घंटे बाद ही चाय, कॉफी, सॉफ्ट ड्रिंक्स आदि कैफीन वाली चीजें लेनी चाहिए। इनमें मौजूद टैनिन नामक हानिकारक रसायन शरीर में आयरन की प्रक्रिया को बाधित करता है, जिससे खून की कमी होने लगती है। पाचन भी खराब होता है। हाथ-पैर ठंडे होने, सिर घूमना, भूख न लगने की समस्या हो सकती है। वहीं कुछ लोग खाने के बाद सिगरेट पीते हैं। एक शोध में कहा गया है खाने के बाद का सिगरेट कई गुना अधिक नुकसान करता है। व्यक्ति को आइबीएस यानी इरिटेबल बाउल सिंड्रोम हो सकता है। इसमें पेट में मरोड़, दर्द और अपच की समस्या हमेशा बनी रह सकती है। कुछ लोगों की आदत होती है कि खाने के तुरंत बाद सोने की। ऐसा न करें। हार्ट बर्न यानी सीने में जलन, खरटि आना की परेशानी हो सकती है। खाने के बाद थोडी देर टहल लें और उसके बाद ही सोएं।

मिट्टी से जुड़ा रहा, मिट्टी का दीया

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  राजा के घर, कंगले के घर, हैं वही दीप सुंदर-सुंदर! दिवाली की श्री है पग-पग, जगमग जगमग जगमग जगमग! कवि हरिवंशराय बच्चन की कविता 'आज फिर से तुम बुझा दीपक जलाओ की पंक्तियों में दीपक की महिमा का बखान है। दीपक को मिट्टी, आकाश, जल, अग्नि और वायु का प्रतीक माना जाता है। इसे जलाने का एक मंत्र भी है, जिसका उच्चारण सभी शुभ अवसरों पर किया जाता है... शुभंकरोति कल्याणम् आरोग्य धनसपदा। शत्रुबुद्धि विनाशाय दीपज्योति नमस्तुते।। इसमें कहा गया है कि सुंदर और कल्याणकारी, आरोग्य और संपदा को देने वाले हे दीप, हमारी बुद्धि के विकास के लिए हम तुम्हें नमस्कार करते हैं। भारत में दीए का इतिहास लगभग पांच हजार साल से भी अधिक पुराना माना जाता है। इतिहास और पुरातत्त्व विशेषज्ञों के अनुमान के हिसाब से उस समय पत्थर को तराश कर दीए बनाए गए होंगे। सभ्यता के विकसित होने के साथ साथ, हर चीज मे बदलाव के साथ साथ दीया भी अनेक चरणो से गुजरता गया। विकास के चरण में 1830 में मोम की खोज हुई और उसका इस्तेमाल भी रोशनी फैलाने के रूप में किया जाने लगा। मनुष्य ने आग की खोज की उसके बाद उसे लंबे समय तक जलाए रखने के लिए मशाल, दीयों आ

फेडोरा लिनक्स

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फेडोरा एक लोकप्रिय लिनक्स आधारित ओपन सोर्स आपरेटिंग सिस्टम हैं। फेडोरा को सुरक्षित बहुउपयोगी आपरेटिंग सिस्टम के रूप में विकसित किया गया है। फेडोरा प्रोजेक्ट की सहायता से यह आपरेटिंग सिस्टम 6 माह की रिलीज़ प्रक्रिया में विकसित किया गया है। फेडोरा रेड हैट द्वारा प्रायोजित है। फेडोरा को उबुन्टु के बाद दूसरा लिनक्स डिस्ट्रीब्यूशन बन गया है। फेडोरा पर आधारित 100 से अधिक डिस्ट्रीब्यूशन है, जिनमे रेड हैट एंटरप्राइज लिनक्स (RHEL) भी शामिल हैं।

वायु प्रदूषण से मनुष्य को कौन-कौन सी बीमारियाँ होती हैं?

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प्रश्न 42. वायु प्रदूषण से मनुष्य को कौन-कौन सी बीमारियाँ होती हैं? What are the discases in human by the air pollution ? वायु प्रदूषण से मनुष्य के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है जिसका विवरण निम्नानुसार है- उत्तर- (i) सीसे के कणों से नाड़ी मण्डल (nervous system) में रोग उत्पन्न होते हैं। (ii) फैडमियम श्वसन विष का कार्य करता है, यह रक्त दाब बढ़ाकर हृदय-सम्बन्धी बहुत से विकार उत्पन्न करता है। (iii) नाइट्रोजन आक्साइड से फेफड़ों, हृदय और आँखों में बहुत-से विकार लक्षित होते है। (iv) ओजोन से आँखों के रोग, खाँसी व सीने में दुखत उत्पन्न होती है। (v) लोहे की खानों में यदि लौह अयस्क की धूल में सिलिका धूल मिल जाए तो खनिकों को गंभीर रोग हो जाता है ।

नाभिकीय प्रदूषण के नियन्त्रण के उपाय लिखिए।

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  प्रश्न 38. नाभिकीय प्रदूषण के नियन्त्रण के उपाय लिखिए। Write the measures to control nuclear pollution. उत्तर- नाभिकीय अथवा रेडियोधर्मी प्रदूषण नियन्त्रण के उपाय (Measures to Control Nuclear or Radioactive Pollution) यद्यपि नाभिकीय अथवा रेडियोधर्मी प्रदूषण का समूल नाश नहीं किया जा सकता है, फिर भी निम्नलिखित उपायों का अनुसरण करके इसको नियन्त्रित किया जा सकता है- 1. परमाणु बमों के निर्माण तथा उपयोग पर प्रतिबन्ध लगाया जाए तथा विश्व में नाभिकीय भण्डारों को समाप्त किया जाए। इससे नाभिकीय युद्ध से बचा जा सकता है। 2. भूमिगत, वायुमण्डल तथा जलमण्डल में परमाणु बमों के परीक्षण पर प्रतिबन्ध लगाया जाए। यह अन्तर्राष्ट्रीय कानून बनाकर ही सम्भव हो सकता है। 3. परमाणु बिजलीघरों से उत्पन्न कचरे को दफनाने का पूरा प्रबन्ध किया जाए, जिससे रेडियोधर्मी विकिरण न हो सके। 4. उच्चस्तरीय परमाणु अपशिष्टों के विसर्जन के लिए काँच के जालक बनाने का सुझाव दिया गया है। 5. रिएक्टरों के रख-रखाव में पूर्ण सतर्कता बरतनी चाहिए। समय-समय पर रिएक्टरों व परमाणु संयन्त्रों की टंकियों व पाइप लाइनों की जाँच करते रहना चाहिए तथा जहा

पॉलीथीन क्राफ्ट

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1सामग्री: पॉलिथीन की थैली, कैंची,खाली बोतल, मोटी सूई, सलाइयां,छोटी पेपर प्लेट।   कैंची से पॉलिथीन की पतली-पतली गोल पट्टियां काट लो। एक गोले को दूसरे गोले में फंसाते हुए लंबी डोरी बनाकर गोला बना लो। दो मोटी सलाइया लेकर स्वेटर की तरह बुन लें। बुने हुए भाग को बोतल के चारों तरफ लगाकर सिलाई कर दें। इस बोतल में तरह- तरह के फूल पौधे लगा सकते हैं। मोटी सूई में डोरी को पिरो कर बोतल के चारों तरफ चटाई की तरह एक धागा नीचे से एक धागा ऊपर से लेते हुए बोतल को कवर कर दें। इस से भी सुंदर पोट बनाया जा सकता है। पेपर प्लेट के बीच में से डोरी को चारों तरफ फूल की तरह सिल दें। बीच में डोरी के एक धागा अंदर से एक ऊपर से दूसरी लाइन में ऊपर वाले को नीचे से तथा नीचे वाले को ऊपर से घुमाते हुए फूल बना लें। इसको कोस्टर के रूप में काम में ले सकते हैं।

मेहनत के सहारे

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  एक राह बंद हुई है लेकिन कई खुली भी हैं। वीर दास का मानना है कि देश-विदेश में टूर करते हुए भरे सभागारों में लाइव शो करना कॉमेडियंस के लिए अब कम से कम छह महीनों तक संभव नहीं होगा। अब जूम, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर लाइव शो करते हुए कॉमेडियंस अधिक से अधिक ऑनलाइन आ रहे हैं। खुद वीर दास ने वीर दास एट होम' श्रृंखला शुरू की है, ये शहर विशिष्ट टिकट वाली श्रृंखला हैं, जिससे होने वाली आय वह कोरोना पीड़ितों की मदद करने वाले विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों को दे रहे हैं। वीर दास अपने शो में क्वॉरंटीन स्पेशल डिजिटल कंटेंट देते हैं।   मेहनत के सहारे  वीरदास ने एक फेसबुक पोस्ट में बताया था कि कैसे संघर्ष के दिनों में वह शिकागो के ग्रैंड लक्स कैफे में डोरमैन थे। कई वर्ष बाद इसी होटल में जब वह एक परफॉर्मेंस के लिए गए तो उनके नाम का बैनर उसी होटल के मुख्यद्वार पर लगा हुआ था।

दीपक जलाना आ गया

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  हर किसी सांचे में ढलना आ गया है, हमको गिर गिर कर संभलना आ गया है। अब नहीं हमको किसी से कोई शिकवा धीरे धीरे अब हमें खुद को बदलना आ गया है। क्यों करें बेकार फूलों के चरण की वन्दना, दोस्तों बेखोफ कांटों पे चलना आ गया है। झूठे वादों के थिरकते घुघरुओं को बांध कर, इस सदी को झूमकर ठुमक लगाना आ गया है। डर नहीं अंधड़ का या झंझावात का, आंधियों की गोद में दीपक जलाना आ गया है।   सेवानिवृत्त शिक्षक है