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Showing posts from November, 2020

सफलता के मूल सूत्र -: दिमाग तेज करे

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                अगर आप अपने दिमाग का सही तरह से इस्तेमाल करते हैं, तो आपको सफल होने से कोई भी नहीं रोक सकता। आपको अपने दिमाग के काम करने के तरीके के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। आपको अपने ब्रेन की क्षमताओं पर भरोसा करके मंजिल प्राप्त करने की दिशा में जुट जाना चाहिए।   दिमाग पर डालें जोर   रोज सोने से पहले पूरे दिन की गतिविधियों पर गौर करने की आदत डालनी चाहिए। छोटी-छोटी बातों पर विचार करना चाहिए। इससे दिमाग मजबूत बनता है। खुद से सवाल करें- आज दिनभर में मैंने क्या खास सीखा? क्या मैंने अपने दिमाग को किसी तरह की चुनौती दी? खास चीजों को याद करने की कोशिश करें। आप जिन लोगों से मिले, उनके नाम दोहराएं।   दिमाग पर डालें जोर रोज सोने से पहले पूरे दिन की गतिविधियों पर गौर करने की आदत डालनी चाहिए। छोटी-छोटी बातों पर विचार करना चाहिए। इससे दिमाग मजबूत बनता है। खुद से सवाल करें- आज दिनभर में मैंने क्या खास सीखा? क्या मैंने अपने दिमाग को किसी तरह की चुनौती दी? खास चीजों को याद करने की कोशिश करें। आप जिन लोगों से मिले, उनके नाम दोहराएं।   मल्टीटास्किंग से बचें     लोगों को लगता है कि एक स

प्रॉपर्टी में निवेश का सही समय

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प्रॉपर्टी में निवेश का सही समय अपना पहला घर खरीदने वाले युवाओं की टेंशन होगी कम अपनाएं ये आसान टिप्स     1) युवा खरीदार जो अपने कॅरियर की शुरुआत करने जा रहे हैं, जिनके कुछ दोस्तों ने प्रॉपर्टी में निवेश किया है या दूसरे जिन्होंने अपार्टमेंट पर विचार किया है। अगर युवा अपने सपनों का घर खरीदना चाहते हैं तो निवेश करने से पहले इन बातों को ध्यान में रखें। 2) अगर आप लंबे समय के लिए भूखंड में निवेश करना चाहते हैं तो आप यह निश्चित करें, आपको भूखंड किस इलाके में चाहिए। आप निवेश करने से पहले औपचारिक रूप से अपने लाभ का अनुमान लगाएं। 3) आप तुरंत लाभ की उम्मीद न करें, क्योंकि 8-10 साल बाद अच्छा रिटर्न मिलता है। 4) एक खरीदार को ध्यान रखना चाहिए, आर्किटेक्ट को हायर करना, पानी, बिजली की सप्लाई करना आदि सारी जिम्मेदारी खुद पर होती है। 5) अपने भूखंड को क्षेत्रफल, आकृति के अनुसार डिजाइन करें। 6) खास तौर पर भूखंड खरीदने से पहले आपको इलाके के मास्टर प्लान के बारे में जान लेना चाहिए। साथ ही आस-पास बाजार का पूरी तरह अध्ययन कर लेना चाहिए, ताकि बाद में कानूनी पेचीदगियों से बच सकें। 7) भूखंड की कीमत समय के

खाने को बार बार गर्म कर न खाए, हो सकता है नुकसान

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  कई बार खाने को दोबारा गर्म करना नुकसानदायक हो सकता है। हरी सब्जियां जैसे लौकी, तुरई, पालक, मेथी, चुकंदर आदि को दोबारा से गर्म करने पर नाइट्रेट नष्ट हो जाता है। पानी की मात्रा खत्म हो जाती है। इससे स्किन पर दाने भी निकल आ सकते हैं। मशरूम, अंडा, चिकन व मीट को दोबारा से गर्म करने पर उसका प्रोटीन और कैल्शियम नष्ट हो जाता है।  आलू में विटामिन बी 6, पोटैशियम और विटामिन सी होता है।  दोबारा गर्म करने से इसमें 'क्लोसट्रीडियम बोटुलिनम' पैदा हो सकता है। ये बैक्टीरिया का कारण बनाता है।   बढ़ता है ट्रांस फैट डीप फ्राई वाली चीजों को भी दोबारा गर्म नहीं करना चाहिए जैसे समोसे, पकौड़े, कचौरी आदि। इन्हें दोंबारा से गर्म करने से केवल ट्रांस फैट की मात्रा इसमें बढ़ती है बल्कि उसकी पोषकता भी कम होती है। ट्रांस फैट से कोलेस्ट्रॉल बढ़ता और कैंसर का खतरा होता है। सुरभि पारीक, डायटीशियन
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आत्मबल का महत्त्व   आत्मबल एक ऐसा गुण है, जो हमारे पुरुषार्थ को जाग्रत रखता यह गुण कठिन क्षणों में ऊर्जा का स्रोत साबित होता है। आत्मबल हमें हर बुराई और विघ्न-बाधाओं से बचाता है। कहते हैं कि मरणासन्न शरीर में भी नवजीवन का संचार कर दे, ऐसी अमृत बूंद है आत्मबल। सच तो यह है कि जहां कोई प्राणी हमारा सहायक नहीं होता,वहां हमारा आत्मबल हमें सहारा देता है। यह हमें न सिर्फ दृढसंकल्पीऔर साहसी बनाता है, बल्कि जीवन-संग्राम में जीतने की अदम्य इच्छाशक्ति भी प्रदान करता है। यह हमें न सिर्फ अच्छे कर्म करने के लिए प्रेरित करता है, बल्कि हमें प्रतिकूल परिस्थितियों से निकलने की हिम्मत भी देता है। यह हमारा ऐसा बलवान साथी है, जो जीवन के घनघोर अंधेरे से हमें बाहर निकाल सकता है। आत्मबल संसार का सबसे बड़ा बल है। यह बल मनुष्य के सर्वांगीण विकासका कारण और समाज का उत्थान करन वाला है। अतः मनुष्य को सरलता से जीवन जीना चाहिए। धन, लोभ, आकांक्षा, अहंकार और पद-प्रतिष्ठा के चक्कर में हम अपना पूरा जीवन बिता देते हैं। इसलिए समय की कीमत समझने वाले इसे व्यर्थ नहीं करते, क्योंकि बीता समय वापस नहीं आने वाला है। आत्मबल जिसका
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  खाने से एक घंटे पहले या बाद में ही पीनी चाहिए चाय-कॉफी   डॉक्टरों की मानें तो खाने से एक घंटा पहले और एक घंटे बाद ही चाय, कॉफी, सॉफ्ट ड्रिंक्स आदि कैफीन वाली चीजें लेनी चाहिए। इनमें मौजूद टैनिन नामक हानिकारक रसायन शरीर में आयरन की प्रक्रिया को बाधित करता है, जिससे खून की कमी होने लगती है। पाचन भी खराब होता है। हाथ-पैर ठंडे होने, सिर घूमना, भूख न लगने की समस्या हो सकती है। वहीं कुछ लोग खाने के बाद सिगरेट पीते हैं। एक शोध में कहा गया है खाने के बाद का सिगरेट कई गुना अधिक नुकसान करता है। व्यक्ति को आइबीएस यानी इरिटेबल बाउल सिंड्रोम हो सकता है। इसमें पेट में मरोड़, दर्द और अपच की समस्या हमेशा बनी रह सकती है। कुछ लोगों की आदत होती है कि खाने के तुरंत बाद सोने की। ऐसा न करें। हार्ट बर्न यानी सीने में जलन, खरटि आना की परेशानी हो सकती है। खाने के बाद थोडी देर टहल लें और उसके बाद ही सोएं।
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    मानसून मे होने वाली बीमारियों से बचाती है धनिए कि पंजीरी प्रयोग विधि भाद्रपद माह में ही कृष्ण जन्म अष्टमी मनाते हैं और धनिया से बनी पंजीरी प्रसाद में लेते हैं। धनिया मानसून रोगों से बचाती है। वर्षा ऋतु में वात का प्रकोप, कफ और पित्त का संचय बढ़ जाता है। इससे पेट की अग्निमंद हो जाती और पाचन बिगड़ जाता है। वात बढ़ने से नर्वस सिस्टम प्रभावित होता, शरीर में दर्द या जकड़न बढ़ जाती है। धनिया दूषित तत्वों को बाहर निकलती है। इनमें फाइबर, कैल्शियम व एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। इसमें मिश्री मिलाते हैं तो इसकी ठंडी तासीर पेट के संक्रमण और इससे जुड़े रोगों से बचाव होता है। कफ-पित्त का शमन करती है। ऐसे तैयार करें पंजीरी धनिया का चूर्ण बनाकर घी में भून लें। इसे स्वादिष्ट-गुणकारी बनाने के लिए इसमें भुना मखाना और चिरौंजी मिला सकते हैं। धनिया-मेवे का एक चौथाई हिस्सा मिश्री पाउडर या बूरा मिला लें। पंचीरी तैयार हो गई। डॉ.कमला नागर, आयुर्वेद विशेषज्ञ

अनुपयोगी वस्तु के दान का अधर्म और नचिकेता का धर्म

 यदि हमारा वर्तमान अव्यवस्थित और भविष्य अंधकारमय दिख रहा है, तो इसका कारण भी यही है कि वर्तमान के अविभावक अपने बच्चों को धार्मिक संस्कार नहीं दे रहे । यज्ञ के लिए आए ऋषियों को बूढ़ी और बीमार गायें दी जाने लगीं तो नचिकेता ने पिता को टोका, \'यह पाप है तात! दान के रूप में अनुपयोगी वस्तु देना घोर अधर्म होता है। अपने कार्य में लगे नचिकेता के पिता ऋषि वाजिश्रवा ने पुत्र की बात पर ध्यान नहीं दिया तो पुत्र ने पुनः पुनः कहा, \'यह घोर अधर्म है। इससे अच्छा है कि आप मुझे किसी को दान कर दें।\' वाजिश्रवा ने चिढ़ कर कहा, \'जाओ! मैंने तुम्हें यमराज को दान किया...\' यमराज को दिए जाने का अर्थ है मृत्यु को प्राप्त होना। नचिकेता ने पिता को प्रणाम किया और यमराज के पास जाने को तैयार हो गया। जाने को तैयार हो गया। यह भारत भूमि और सनातन धर्म की महानता है कि एक नन्हा बालक कर्तव्यपरायणता में हुई अपने पिता की भूल का प्रतिरोध करता है और उसका आचरण इतना मर्यादित है कि पिता के अधर्म का प्रतिरोध करने के बाद भी पिता की प्रतिष्ठा को चुनौती नहीं देता, बल्कि क्रोध में बोले गए उनके बल्कि क
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 डाटा इन्टीग्रिटी क्या होती है एवं इसके कितने प्रकार होते है ? समझाइये    

रद्दीवाला

  वेंकटेश बाबू 75 वर्ष की उम्र में भी साहित्य जगत में कभी लेखन कर तो कभी अध्ययन कर व्यस्त बने रहते। यद्यपि अब उनके यहां पहले की तरह पत्र-पत्रिकाएं नहीं आतीं। बस अखबार में आने वाले साप्ताहिक परिशिष्टों से ही अपना मन बहलाते व नया क्या कुछ लिखा जा रहा है, इसकी जानकारी मिलती। समय मिलता तो अपनी पुरानी पत्रिकाएं जो अलमारी में जमी पड़ी हैं, उसमें से कोई पत्रिका निकालकर पढ़ते। उन्हें ही उलट-पुलट अपनी साहित्यिक रुचि बनाए रखते। परिवार में विस्तारित होती जरूरतों के चलते अलमारी में बच्चों के खेल- खिलौने स्मृति चिन्ह को रखने की बात चलती रहती। पत्नी लक्ष्मी तो वैंकट बाबू से कई बार कह चुकी अलमारी खाली करने का वह प्रायः कहती रहती-'इस पुराने अटाले को रद्दी के हवाले करो, ताकि नई चीजों के लिए अलमारी खाली हो सके।' प्रत्युत्तर में बस वह एक ही बात कहते-'इन्हें दूसरे कमरे में रख दो। यहां मुझे इस इससे सुविधा है। पर लक्ष्मी रहा मानने वाली थी। उसने तो जैसे रद्दी निकालने की कसम खा रखी थी। आखिर एक दिन लक्ष्मी ने रद्दी वाले को आवाज देकर गेट पर बुला लिया। दस रुपए किलो में बात ठहरी। अभी रद्दी वाला पत्रिक

राहु-केतु देवता बने

समुद्र-मंथन के फलस्वरूप देव व दानवों को धनवंतरि ने अमृत से भरा कलश भेंट किया था। विवाद होने पर भगवान विष्णु ने मोहिनी-अवतार लेकर समान रूप से बांटने का दायित्व ले लिया और देवताओं को अमृत व दानवों को साधारण जल पिलाना तय किया। स्त्री-सौंदर्य से निर्लिप्त राहु ने विष्णु की इस चालाकी को समझ लिया और उसने देवों की पांत में बैठकर अमृत पी लिया। भगवान विष्णु ने जाना तो सुदर्शन चक्र से राहु का सिर धड़ से अलग कर दिया। राहु का सिर तो वहीं रहा , किंतु धड़ गौतमी नदी के तट पर जा गिरा। चूंकि राहु अमृत रूपी संजीवनी पी चुका था, अतऐव उसके शीश व धड़ दोनों जीवित रहे। चिंतित देवताओं ने भगवान शिव से राहु का शीश व धड़े पूरी तरह नष्ट कर देने के उपाय की प्रार्थना की । शिव ने दिव्य-ऊर्जा व योग बल से देवी चंडिका का अस्तित्व रच राहु के सर्वनाश का आदेश दिया। चंडिका राहु के धड़ को राई-रक्ती भी हानि नहीं पहुंचा पाई। तब ब्रह्मा युद्ध-स्थल पर पधारे। उन्होंने राहु को देवगणों में शामिल होने का आशीर्वाद दिया। तब राहु ने चंडिका को अपनी मृत्यु का रहस्य बताया। तत्पश्चात चंडिका ने धड़ को दो फाड़ करके उसमें संचित अमृत स्वयं पी

जल्दी बुलाकर लाओ

  बादशाह अकबर एक सुबह उठते ही अपनी दाढ़ी खुजलाते हुए बोले, "अरे, कोई है?"' तुरन्त एक सेवक हाजिर हुआ। उसे देखते ही बादशाह बोले, "जाओ, जल्दी बुलाकर लाओ, फौरन हाजिर करो।" सेवक की समझ में कुछ नहीं आया कि किसे बुलाकर लाए, किसे हाजिर करे? बादशाह से पलटकर सवाल करने की तो उसकी हिम्मत ही नहीं थी। उस सेवक ने यह बात दूसरे सेवक को बताई। दूसरे ने तीसरे को और तीसरे ने चौथे को। इस तरह सभी सेवक यह बात जान गए और सभी उलझन में पड़ गए कि किसे बुलाकर लाएँ, किसे हाजिर करें। बीरबल सुबह घूमने निकले थे उन्होंने बादशाह के निजी सेवकों को भाग-दौड़ करते देखा तो समझ गए कि जरूर बादशाह ने कोई अनोखा काम बता दिया होगा, जो इनकी समझ से बाहर है। उन्होंने एक सेवक को बुलाकर पूछा, "क्या बात है? यह भाग-दौड़ किसलिए हो रही है?" सेवक ने बीरबल को सारी बात बताई, '"बीरबल जी! हमारी रक्षा करें। हम समझ नहीं पा रहे हैं कि किसे बुलाना है। अगर जल्दी बुलाकर नहीं ले गए, तो हम पर आफत आ जाएगी।" बीरबल ने पूछा, "यह बताओ कि हुक्म देते समय बादशाह क्या कर रहे थे? बादशाह का निजी सेवक, जिसे हुक्म