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Showing posts from October, 2020
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 Motivational quotes & Nobel thoughts  

कठोरता से संवारा शिष्य का जीवन

बात उस समय की है जब उज्जैन के राजकुमार सातवाहन गुरु शिवदास के आश्रम में अध्ययनरत थे। सातवाहन अनेक बुरी आदतों का शिकार था।शिवदास ने जब यह देखा. तो सबसे पहले इन्हें छुड़ाने का प्रयास किया. क्योंकि सातवाहन भविष्य का राजा था। राजा यदि आदर्श होगा तो प्रजा में अच्छे संस्कार रहेंगे। 'यथा राजा तथा प्रजा' के सिद्धांत को ध्यान में रखकर शिवदास ने सातवाहन के साथ सख्ती का व्यवहार किया। उसकी बुरी आदतों के लिए उसे अनेक सामान्य विद्यार्थियों की तरह दंडित किया। अंततः शिवदास के प्रयास सफल रहे। और राजकुमार ने अपनी बुरी आदतों का त्याग कर दिया। उचित समय आने पर सातवाहन उज्जैन के राजसिंहासन पर बैठे। किसी कारणवश तब तक गुरु शिवदास की स्थिति निर्धनता के कारण बहुत दयनीय हो गई थी। अपना गुजारा,चलाने के लिए उन्हें भिक्षावृत्ति करनी पड़ती थी। एक दिन वे भिक्षा मांगते हुए राजमहल के सामने पहुंचे। संयोग से राजा सातवाहन ने उन्हें देख लिया। अपने गुरु को याचक के रूप में देखकर राजा ने कहा, 'आपने मुझे इतना अधिक दडित किया है, कई बार तो पीटा भी है कि अब आपकी इस दुर्दशा पर मुझे तनिक भी दया नहीं आ रही है।' राजा

झेन गुरू ने तोड़ा युवा धनुर्धर का घमंड

धनर्विद्या की कई स्पर्धां जीतने के बाद एक युवक घमंडी जापानी चैंपियन ने धनुर्विंद्या के लिए मशहूर एक पुराने झेन गुरु को चुनौती दी। वह उनके आश्रम गया और वहां टारगेट बोर्ड के केंद्र में बढी सफाई से निशाना लगाया फिर एक और तीर चलाकर पहले तीर के टुकड़े-दुकड़े कर दिए। इसके बाद उसने झेन गुरु से पूछा, क्या आप ऐसा कर सकते हैं?' झेन गुरु ने अपना धनुष नहीं निकाला। वे शांति से उठे और उसे अपने पीछे आने के लिए कहा। आश्रम के पीछे थोड़ा चलने के बाद वे एक छोटी पहाड़ी के पास पहुंचकर ऊपर चढ़ने लगे। पीछे-पीछे युवक भी चल रहा था। चोटी पर पहुंचने के बाद युवक ने देखा कि समीप ही एक और वैसी ही चोटी है। दोनों के बीच बिना रैलिंग बाला लकड़ी का संकरा तथा जर्जर पुल है और नीचे है हजारों फीट गहरी खाई। झेन गुरु तेजी से चलते हुए पुल के मध्य में पहंचे और बड़ी सफाई से दूर स्थित वृक्ष पर निशाना लगाया। फिर वे मुड़े और युवक से बोले, "तुम्हारी बारी।' इतना कहकर के जगह पर लौट आए। युवा धुनर्धर खोफभरी आँखों से खाई की अतल गहराई को ओर देखने लगा। उसकी हिम्मत नहीं हुई कि वह पुल के मध्य में जाकर अपनी धनुर्विंध्या का कौशल